dividend kya hai aur kaisa milta hai

डिविडेंड (Dividend) क्या है और कैसे मिलता है? – सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों के लिए डिविडेंड (Dividend) एक महत्वपूर्ण विषय है। अक्सर जब हम किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो हमें दो तरह से लाभ मिल सकता है –

  1. शेयर की कीमत बढ़ने से (Capital Gain)

  2. कंपनी की कमाई में हिस्सेदारी (Dividend)

इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि डिविडेंड क्या है, यह कैसे मिलता है, इसके प्रकार, फायदे-नुकसान, टैक्स नियम और निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

डिविडेंड क्या है?

डिविडेंड (Dividend) वह हिस्सा है जो कोई कंपनी अपनी कमाई (Profit) में से अपने शेयरधारकों (Shareholders) को देती है।

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👉 आसान शब्दों में कहें तो –
जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं तो आप उस कंपनी के हिस्सेदार (Owner) बन जाते हैं। अगर कंपनी को मुनाफा होता है और वह अपनी कमाई का कुछ हिस्सा निवेशकों में बांटना चाहती है, तो उस हिस्से को डिविडेंड कहा जाता है।

यह नकद (Cash) या शेयर (Stock Dividend) के रूप में मिल सकता है।

डिविडेंड कैसे मिलता है?

डिविडेंड मिलने की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है –

  1. कंपनी का मुनाफा (Profit Earning):
    कंपनी सालाना या तिमाही आधार पर कमाई करती है।

  2. बोर्ड मीटिंग (Board of Directors):
    कंपनी का बोर्ड तय करता है कि कितना मुनाफा शेयरधारकों को बाँटना है।

  3. डिविडेंड घोषणा (Dividend Declaration):
    कंपनी एक्सचेंज और निवेशकों को सूचित करती है कि डिविडेंड कितने रुपये प्रति शेयर दिया जाएगा।

  4. Record Date और Ex-Dividend Date:

    • Record Date – जिस दिन तक जिनके पास कंपनी के शेयर होंगे, वही डिविडेंड के हकदार होंगे।

    • Ex-Dividend Date – अगर आप इस तारीख के बाद शेयर खरीदते हैं तो आपको डिविडेंड नहीं मिलेगा।

  5. Payment Date (भुगतान की तारीख):
    कंपनी तय तारीख पर आपके बैंक अकाउंट या Demat अकाउंट में डिविडेंड भेज देती है।

डिविडेंड के प्रकार (Types of Dividend)

  1. कैश डिविडेंड (Cash Dividend):
    सीधे बैंक अकाउंट में पैसा मिलता है। यह सबसे आम तरीका है।

  2. स्टॉक डिविडेंड (Stock Dividend):
    कंपनी निवेशकों को अतिरिक्त शेयर देती है।

  3. बोनस डिविडेंड (Bonus Shares):
    मुनाफे में से बोनस शेयर जारी किए जाते हैं।

  4. स्पेशल डिविडेंड (Special Dividend):
    यह तब दिया जाता है जब कंपनी को अचानक बहुत बड़ा मुनाफा होता है।

  5. इंटरिम डिविडेंड (Interim Dividend):
    साल खत्म होने से पहले, तिमाही या आधे साल पर दिया जाने वाला डिविडेंड।

  6. फाइनल डिविडेंड (Final Dividend):
    वित्तीय वर्ष के अंत में घोषित किया जाने वाला डिविडेंड।

डिविडेंड और शेयर की कीमत का रिश्ता

  • जब डिविडेंड घोषित होता है तो कई बार शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

  • Ex-Dividend Date पर अक्सर शेयर की कीमत उतनी ही गिर जाती है जितना डिविडेंड दिया जा रहा है।

  • लंबे समय के निवेशक इसे एक Passive Income के रूप में देखते हैं।

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डिविडेंड पाने के फायदे

  1. नियमित आय (Regular Income):
    निवेशकों को समय-समय पर अतिरिक्त कमाई होती है।

  2. कम रिस्क (Low Risk):
    डिविडेंड देने वाली कंपनियाँ अक्सर मजबूत और स्थिर होती हैं।

  3. लंबी अवधि का लाभ:
    डिविडेंड को री-इन्वेस्ट करने से कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।

  4. Passive Income Source:
    शेयर बेचे बिना भी पैसा मिलता है।

डिविडेंड के नुकसान

  1. शेयर की कीमत में गिरावट:
    Ex-Dividend Date के बाद शेयर प्राइस घट सकता है।

  2. टैक्स नियम:
    डिविडेंड पर टैक्स देना पड़ सकता है।

  3. हमेशा गारंटी नहीं:
    हर साल कंपनी डिविडेंड दे यह जरूरी नहीं है।

भारत में डिविडेंड पर टैक्स नियम (2025 के अनुसार)

  • डिविडेंड निवेशक की इनकम में जोड़कर टैक्स लगाया जाता है।

  • अगर आपका सालाना डिविडेंड ₹5,000 से ज्यादा है, तो कंपनी TDS काट लेगी।

  • TDS दर: 10% (PAN लिंक न होने पर 20%)

  • इसके बाद आपको ITR में डिविडेंड इनकम दिखानी होती है।

डिविडेंड देने वाली टॉप भारतीय कंपनियाँ (उदाहरण)

  1. ITC Limited – उच्च डिविडेंड देने के लिए प्रसिद्ध

  2. Coal India – नियमित रूप से अच्छा डिविडेंड

  3. Hindustan Zinc

  4. ONGC

  5. Infosys

  6. HDFC Bank

(ध्यान दें: यह निवेश सलाह नहीं है, केवल जानकारी हेतु है।)

डिविडेंड इन्वेस्टिंग क्या है?

Dividend Investing एक निवेश रणनीति है जिसमें निवेशक ऐसी कंपनियों में निवेश करते हैं जो नियमित डिविडेंड देती हैं।

👉 उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10 लाख ऐसी कंपनियों में निवेश करते हैं जिनकी Dividend Yield 5% है, तो सालाना ₹50,000 तक की अतिरिक्त आय हो सकती है।

डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) क्या है?

डिविडेंड यील्ड वह अनुपात है जो दिखाता है कि आपको कंपनी के शेयर प्राइस के मुकाबले कितना डिविडेंड मिल रहा है।

डिविडेंड निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

  1. हमेशा मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियाँ चुनें।

  2. केवल डिविडेंड देखकर निवेश न करें।

  3. डिविडेंड और कैपिटल गेन दोनों को मिलाकर देखें।

  4. टैक्स नियमों को समझकर निवेश करें।

  5. डिविडेंड को Reinvest करने पर कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

FAQs – डिविडेंड से जुड़े सामान्य प्रश्न

Q1. क्या हर कंपनी डिविडेंड देती है?
👉 नहीं, केवल वही कंपनियाँ डिविडेंड देती हैं जिनका मुनाफा स्थिर होता है और वे इसे शेयरधारकों में बांटना चाहती हैं।

Q2. डिविडेंड कब मिलता है?
👉 यह कंपनी की Board Meeting और घोषणा पर निर्भर करता है। आमतौर पर तिमाही या साल में एक बार।

Q3. क्या डिविडेंड टैक्स-फ्री है?
👉 पहले टैक्स-फ्री था, लेकिन अब निवेशकों को अपनी इनकम में दिखाना पड़ता है और टैक्स चुकाना होता है।

Q4. क्या डिविडेंड से अमीर बना जा सकता है?
👉 हाँ, अगर लंबे समय तक उच्च डिविडेंड यील्ड वाली कंपनियों में निवेश किया जाए तो Passive Income काफी बड़ी हो सकती है।

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निष्कर्ष

डिविडेंड शेयर मार्केट निवेशकों के लिए एक बेहतरीन आय का जरिया है। यह न केवल निवेशकों को नियमित कैश फ्लो देता है बल्कि लंबी अवधि में कंपाउंडिंग ग्रोथ भी प्रदान करता है। हालांकि, निवेश करने से पहले कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति, डिविडेंड हिस्ट्री और भविष्य की ग्रोथ को जरूर परखना चाहिए।

👉 अगर आप सुरक्षित और स्थिर आय चाहते हैं तो डिविडेंड देने वाली कंपनियों में निवेश आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

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